संत समाज की दिव्य विभूति थी ब्रह्मलीन उषा माता महाराज-स्वामी रविदेव शास्त्री
हरिद्वार। जय मां मिशन की संस्थापक ब्रह्मलीन चक्रवर्ती महामंडलेश्वर उषा माता महाराज की 18वीं पुण्यतिथि पर मिशन की सभी शाखाओं में संतों और श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन उषा माता महाराज का भावपूर्ण स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रवणनाथ नगर स्थित जय मां आश्रम में सतों व श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन चक्रवर्ती महामंडलेश्वर उषा माता महाराज और उनके शिष्य ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी महादेव महाराज को नमन किया। इस अवसर पर स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि ब्रह्मलीन चक्रवर्ती महामंडलेश्वर उषा माता महाराज संत समाज की दिव्य विभूति थी।देश भर में जय मां मिशन की स्थापना कर उन्होंने सनातन धर्म संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन में अहम भूमिका निभायी।उनके पदचिन्हों पर चलते उनके शिष्य ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी महादेव महाराज ने जय मां मिशन की सेवा संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। धर्म संस्कृति और मानव सेवा में ब्रह्मलीन उषा माता महाराज एवं उनके शिष्य स्वामी महादेव महाराज का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।जय मां मिशन की अध्यक्ष साध्वी शरण ज्योति मां एवं साध्वी जीवन ज्योति मां ने कहा कि ब्रह्मलीन चक्रवर्ती महामंडलेश्वर उषा माता महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थी।श्रद्धालु भक्तों को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करने के साथ देश की एकता अखण्डता बनाए रखने में उनके योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए मानव सेवा का संकल्प लेना चाहिए।उन्होंने कहा उषा माता एवं स्वामी महोदव महाराज के ब्रह्मलीन होने से धर्म क्षेत्र में जो स्थान रिक्त हुआ है,उसकी पूर्ति असंभव है।लेकिन उनके विचार और कृतित्व सदैव समाज को प्रेरणा देते रहेंगे।इस अवसर पर स्वामी रविदेव शास्त्री,स्वामी हरिहरानंद,स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि,स्वामी दिनेश दास,स्वामी विपनानंद,स्वामी नागेंद्र महाराज,स्वामी शिवम महंत,स्वामी गोपालानंद,साध्वी शरण ज्योति मां,साध्वी जीवन ज्योति मां,साध्वी शीतल ज्योति मां,साध्वी शरद ज्योति मां,साध्वी परम् ज्योति मां,साध्वी पूजा ज्योति मां,साध्वी दिव्य ज्योति मां,जगदीश चावला, पंडित गणेश सहित कई संत महापुरूष व श्रद्धालु मौजूद रहे।