जीवन की सभी प्रतिकूलताओं अथवा अनुकूलताओं को समभाव से स्वीकार करने वाला ही महान बनता है-स्वामी कैलाशानंद गिरी

हरिद्वार। श्रीदक्षिण काली मंदिर में जारी निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज की विशेष शिव साधना 19वें दिन में प्रवेश कर गयी है।भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि जीवन प्रतिपल एक नईं चुनौती प्रस्तुत करता है।लेकिन जो व्यक्ति जीवन की सभी प्रतिकूलताओं अथवा अनुकूलताओं को समभाव से स्वीकार करता है,वही महान भी बनता है। भगवान भोलेनाथ के जीवन की यह सीख बड़ी ही अद्भुत है कि कभी दूध मिला तो प्रसन्न हो गये।कभी केवल पानी ही मिला तो भी प्रसन्न हो गये।कभी शहद अर्पित हुआ तो प्रसन्न हो गये और कभी धतूरा मिला तो उसे भी सहर्ष स्वीकार कर लिया। केवल एक विल्व पत्र और एक लौटा जल अर्पित करने से प्रसन्न होने वाले भगवान भोलेनाथ का जीवन सीख देता है कि आवश्यक नहीं कि हर बार उतना ही मिलेगा जितनी आपकी अपेक्षा है।कभी-कभी कम मिलने पर भी अथवा जो मिले,जब मिले और जितना मिले उसी में संतुष्ट रहना सीख जाओगे तो आशुतोष बनकर समाज का मार्गदर्शन करोगे।स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि गुरूदेव की आराधना सावन पूर्णिमा तक निरंतर जारी रहेगी।