हलाहल विष को कंठ में धारण कर नीलकंठ कहलाए भगवान शिव


हरिद्वार। पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों की याद में श्री अखंड परशुराम अखाड़े की और से जिला कारागार रोशनाबाद में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कथा श्रवण कराते हुए कथाव्यास महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को भगवान शिव का पूजन अभिषेक अवश्य करना चाहिए। स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि समुद्र मंथन से जब हलाहल विष निकला तो संसार को उसके प्रभाव से बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। जिससे उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। विष के प्रभाव से भगवान शिव को हो रही पीड़ा को दूर करने के लिए भक्तों ने उन्हें गंगाजल अर्पण किया। गंगाजल की शीतलता से विष का प्रभाव और भगवान शिव की पीड़ा दूर हो गयी। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने आशीर्वाद दिया कि जो भक्त गंगाजल से मेरा अभिषेक करेगा। उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। तब से भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई। श्रीअखंड परशुराम अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने बताया भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अधिक कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने बताया कि रोशनाबाद जेल केवल जेल नहीं बल्कि एक सुधार गृह है।कैदियों की मनोदशा में बदलाव के लिए नियमित रूप से जेल में धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।इस अवसर पर भगवान शिव का पूजन अभिषेक एवं व्यास पूजन जलज कौशिक,रूपेश कौशिक, विष्णु गौड़,आचार्य विष्णु शास्त्री,आचार्य संजय शर्मा, भागवताचार्य पवन कृष्ण शास्त्री, डा.विशाल गर्ग,हलवाई समाज के अध्यक्ष सोमपाल कश्यप,राकेश उपाध्याय,भजन गायक कुलदीप चौहान, अनुज सैनी,कुलदीप शर्मा,रुद्राक्ष शर्मा,बृजमोहन शर्मा,मनोज ठाकुर,आरडी शर्मा आदि ने भगवान शिव का अभिषेक एवं व्यास पूजन किया।