उपासना करने पर ही मिलता है आशीर्वाद -डॉ.पंड्या

 प्रकृति और मानव मन की उमंग और श्रद्धा का महापर्व है -वसंत


हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार में संस्थापक पंडित श्री राम शर्मा आचार्य जी का आध्यात्मिक जन्मदिन और वसंत पंचमी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बसंत पंचमी आयोजन का शुभारंभ धर्म धजा आरोहण के साथ हुआ जिसे गायत्री परिवार प्रमुख डॉक्टर प्रणव पण्ड्या और शैल जीजी ने देवात्मा हिमालय के समीप किया। इस के बाद मुख्य आयोजन के साथ हुए। इस अवसर पर डॉक्टर प्रणव पण्ड्या वसंत के महात्म्य को बताया। उन्होंने कहा की वसंत अपने साथ मन का उमंग लेकर आता है। यह महापर्व प्रकृति और मानव मन की उमंग का पर्व है। इस वर्ष की वसनत अधिक महत्वपूर्ण है। इस २०२४ का वर्ष परिवर्तन का वर्ष हेै,अंधकार खत्म होगा और अब देवआत्मा आएगी और युग निर्माण का शंखनाद होगा और २०५० तक भारत विश्व गुरु बनेगा। २०२४ से २०२६ तक दो वर्ष कठोर साधना का महा पर्व प्रांरभ हो रहा है। जो उपासना करता है उसे ही मिलता है ईश्वरीय आशीर्वाद मिलता है। हमें इस कठोर साधना का भागीदार होना है। डॉक्टर पंड्या ने कहा  हमारे लिए तो यह पर्व और भी महत्व रखता है आज हमारे आराध्य का आध्यात्मिक जन्मदिन भी है। आज लिया गया संकल्प अनेक गुना फल देता है हर साधक के में जप के साथ प्राण घुलना चाहिए तभी मिलती है उसे जीवन में सफलता। उन्होंने गायत्री मंत्र के तीन चरणों को वसंत के साथ जोड़ते हुए वंसनत का माहत्मा पर प्रकाश डाला। गायत्री के तीन चरण हमें  शौर्य,बलिदान शौर्य,समृद्धि और बोध का सन्देश देता है। इस अवसर पर गायत्री परिवार की अध्यक्षा और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति शैल दीदी ने इस अवसर पर कहा की संवेदना का पर्व का दिन हे बसंत आज के ही दिन ही मानव के स्वभाव को झंकृत करती है। जीजी ने कहा की विचारों और भावनाओं की शक्ति अपार है,इन शक्ति को जगाना ही अनिवार्य है। विचारों का स्थान सूक्ष्म में है। इससे पूर्व पर्व पूजन का पूजन का कर्म श्रद्धेय द्वैय द्वारा किया गया। इसके साथ ही आज से प्रारम्भ विश्वस्तरीय चालीस दिवसीय साधना का संकल्प डॉक्टर प्रणव पंड्या ने कराया। वंसत के पावन पर्व के अवसर पर दिव्य तीर्थ में १७ जोड़े का आदर्श विवाह हुआ। इसके साथ 350 से अधिक यज्ञोपवीत संस्कार,७०० से अधिक मुंडन,५००० से अधिक दीक्षा सहित अनेक संस्कार समापन हुआ। वसंत के अवसर पर विश्व भर से आये साधको ने पर्व पूजन और पादुका पूजन का कर्म किया,जो निरंतर शाम तक चलता रहा। पर्व पूजन कर्म शांतिकुंज के स्वयंसेवी कार्यकर्ता उदय मिश्र,डॉ.गायत्री किशोर,मंच संचालन ओमकार पाटीदार ने किया और वासंती प्रज्ञा गीत शिव नारायण,राजकुमार वैष्णव,नारायण,वसंत आदि की टीम ने कराया।