आनुवांशिक रोंगों से गर्भस्थ शिशु का बचाव एवं रोकथाम विषय पर कार्यशाला का आयोजन


 हरिद्वार। स्त्री एवं प्रसूति रोग विेशेषज्ञ महिला चिकित्सकों की संस्था फोग्सी एवं लाईफ सेल के संयुक्त तत्वावधान में आनुवांशिक रोगों के प्रति जागरूकता एवं इससे गर्भ में पलने वाले बच्चे के बचाव एवं रोकथाम को लेकर मध्य हरिद्वार में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने थैलेसीमिया, हीमोफीलिक्स, सिस्टिकफाईब्रोसिस, एनीमिया जैसे आनुवांशिक रोगों पर व्याख्यान दिया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए रेडियोलाॅजिस्ट डा.शौर्य शर्मा ने बताया कि आनुवांशिक रोगों के प्रति जागरूकता ही बचाव का बेहतर तरीका है। अल्ट्रासाउंड और कलर डाॅप्लर जांच से बच्चे के शारीरिक विकास की स्थिति का पता चलता है। अधिकांश मामलों में माताएं चाहती हैं कि उनका और बच्चे का स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक हो। गर्भावस्था के 12 से 13 हफ्ते और दूसरा 18 से 22 हफ्ते में लेवल टू स्केन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। कई बार सभी रिपोर्ट नाॅर्मल होने पर भी बच्चा एब्नाॅर्मल होता हैं। ऐसा आनुवांशिक रोगों के चलते होता है। ब्लड टेस्ट के बाद भी जब हम संतुष्ट नहीं होते हैं तो पेट के अंदर सुई डालकर पानी की जांच करते हैं। इस जांच के रिजल्ट सबसे सटीक होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गर्भवती महिलाओं को जांच चिकित्सक की सलाह पर समय समय पर जांच अवश्य करानी चाहिए। गुड़गांव से आयी फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ डा.श्रेयषी शर्मा ने बताया कि गर्भ धारण के चार हफ्ते बाद महिला की जांच आवश्यक है। कई बार कुछ आनुवांशिक समस्याएं होती है। जिसका जांच से पता कर इलाज किया जा सकता है। पहले तीन महीने में डाउन सिंड्रोम, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया आदि जैसे आनुवांशिक रोग की संभावना होने का पता लगाकर बच्चे पर होने वाले प्रभाव का पता लगाया जा सकता है और सही समय पर रोकथाम की जा सकती है। समय पर जानकारी मिलने पर बच्चे और मां के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यशाला के उपरांत दोनों विशेषज्ञों को चिकित्सकों ने पुष्पगुच्छ और प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया। कार्यशाला में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा.नीता मेहरा,डा.सरिता सिंघल,डा.संध्या शर्मा,डा.मनप्रीत कौर,डा.सुजाता प्रधान,डा.सोनल वशिष्ठ,डा.अंजलि वर्मा, डा.सुनीता गुप्ता, डा.ममता, डा.वसुंधरा,डा,शिल्पा शर्मा आदि मौजूद रहे।