महान क्रांतिकारी एवं समाजसेवी महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर श्रद्वांजलि दी


 हरिद्वार। इन्टरनेशनल गुडविल सोसायटी ऑफ इंडिया हरिद्वार चेप्टर द्वारा महान क्रांतिकारी एवं समाजसेवी महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर वेबिनार के जरिये श्रद्वांजलि दी। इस अवसर पर राष्टीªय अध्यक्ष ई मधुसूदन आर्य ने अध्यक्षता करते हुये कहा कि महाराष्ट्र की भूमि वीरों एवं सन्तों की भूमि रहा है,यहां पर ऐसे महामानव भी हुए हैं, जिन्होंने अनेक यातनाएं सहकर भी सामाजिक सुधार सम्बन्धी कार्य किये हैं। ऐसे महान् व्यक्तियों में से एक थे-महात्मा ज्योतिबा फूले। उन्होने कहा कि आज 11 अप्रैल को महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती है। आज देश में हर महिला स्वतंत्र है। महिलाएं हर क्षेत्र में आदमी के समान काम कर रही हैं अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक, सामाजिक और पारंपरिक बाधाओं को तोड़ रही हैं, लेकिन ऐसा पहले नहीं था, इस बदलाव के पीछे सिर्फ महात्मा ज्योतिराव फुले को हाथ था। समाज सुधार के प्रति उनकी निष्ठा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। वेबिनार में डॉ सुनील बत्रा ने कहा कि ज्योतिबा फुले भारतीय समाज में स्त्री-पुरुषों के बीच विभेद को कम करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 1848 में एक स्कूल की स्थापना की। उन्होंने खेतों में या अन्य जगह काम करने वाले मजदूरों और गृहणियों के लिए रात्रि पाठशालाएं खोली एवं अध्यापन कार्य चलाया। यह भारत की पहली रात्रि पाठशाला व प्रौढ़शाला थी। उस समय शिक्षा घर-घर पहुंचाने की पहल चल रही थी। ज्योतिबा फुले ने श्रमिकों के लिए रात्रि स्कूल खोलकर उन लोगों का शिक्षा की तरफ ध्यान आकर्षित किया था। मानव अधिकार संरक्षण समिति की कनखल नगर अध्यक्षा रेखा नेगी ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले को 19वी. सदी का प्रमुख समाज सेवक माना जाता है। उन्होंने भारतीय समाज में फैली अनेक कुरूतियों को दूर करने के लिए संघर्ष किया। अछुतोद्वार, नारी-शिक्षा, विधवा विवाह और किसानो के हित के लिए ज्योतिबा ने उल्लेखनीय कार्य किया है। कमला जोशी ने कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले 19वीं सदी के एक महान समाज सुधारक, समाजसेवी, लेखक और क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे। 11 अप्रैल को इनकी जयंती है। सन् 1827 में महाराष्ट्र के सतारा में ज्योतिराव फुले का जन्म हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन महिलाओं और दलितों के उत्थान में लगा दिया। वह हमेशा से ही स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार दिलाने और बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए काम किया करते थे। इस अवसर पर अन्नपूर्णा बंधुनी ने कहा कि ज्योतिबा फूले ने उस समय धार्मिक रूढ़िवादिता से दूर एक ऐसे समाज की संकल्पना की थी, जो ज्ञान का प्रकाश दे सके। भेदभाव रहित समानतावादी सत्यशोधक समाज की स्थापना करने वाले तथा नारी शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाले ज्योतिबा फूले का नाम अविस्मरणीय रहेगा। इस अवसर पर समिति के संरक्षक जगदीश लाल पाहवा, डॉ विशाल गर्ग, डॉ पवन सिंह,विमल कुमार गर्ग,प्रवीण वैदिक, प्रवीण अग्रवाल,विशाल सक्सेना, अंजली माहेश्वरी, प्रमोद शर्मा, डॉ महेंद्र आहूजा,सर्वेश गुप्ता, सुरेश चन्द्र गुप्ता,यू के गुप्ता, नीरज मित्तल, डॉ अतर सिंह, जे0के0 शर्मा,सुरेश चन्द्र गुप्ता, गोपाल शर्मा एडवोकेट,डा0 अतर सिंह,डा0 राजीव चतुर्वेदी,डा0 पंकज कौशिक,हेमंत सिंह नेगी,कुलभूषण शर्मा,नीलम रावत,साधना रावत कंडारी,नुपूर पाल,अनिल कंसल,शोभा शर्मा, भारती सिंह, अंकुर गोयल, जगदीश बावला,राजीव राय, जितेंद्र कुमार शर्मा, प्रमोद शर्मा,डॉक्टर मनीषा दीक्षित,प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव,सुबोध गुप्ता,लतिका आर्य,करुणा महेश्वरी आदि उपस्थित रहे।