लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई हरकी पैड़ी सहित विभिन्न गंगा घाटों पर डुबकी
कोरोना संक्रमण काल के बाद पहली बार उमड़ी भीड़ से व्यापारियों के चेहरे खिले


 हरिद्वार। कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर्व बड़ी संख्या में श्रद्वालुओं ने पवित्र हरकी पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर पहुंचकर मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। कोरोना संक्रमण काल के बाद पहली बार कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का पुण्य अर्जित करने के लिए देश भर से लाखों श्रद्धालुुओं का सैलाब धर्मनगरी हरिद्वार में उमड़ आया। हरकी पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर श्रदालुओं की भारी भीड़ उमड पड़ी। स्नान पर्व शांतिपूर्ण सम्पन्न हो गया। पुलिस प्रशासन की माने तो देर शाम तक 15लाख श्रद्वालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। पुलिस प्रशासन की ओर से पहले ही कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर्व को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को नौ जोन एवं 32 सेक्टरों में बांटकर अतिरिक्त पुलिसबलों को तैनात किया गया था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्तिक पूर्णिमा स्नान सकुशल संपन्न हो गया। देश के विभिन्न प्रांतो से आए लाखों श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी सहित तमाम घाटों पर गंगा स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। सुरक्षा के लिए मेला क्षेत्र में करीब डेढ़ हजार पुलिस बल की तैनाती के साथ यातायात संचालन व जाम ना लगने देने के लिए ट्रैफिक पुलिस को भी तैनात किया गया था। कार्तिक पूर्णिमा पर होने वाले वर्ष के अंतिम लक्खी स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन की और से मेला क्षेत्र को 9 जोन एवं सेक्टर में बांटकर सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। शास्त्रों व ज्योतिष में कार्तिक पूर्णिमा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने से सुख समृद्धि आती है और पापों से मुक्ति मिलती है। इसके चलते भारी ठण्ड के बावजूद ब्रह्म मुर्हत में सवेरे चार बजे से ही लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए हरकी पैड़ी व दूसरे घाटों पर पहुंच गए और गंगा में स्नान व सूर्य को अध्र्य देकर पुण्य लाभ अर्जित किया। स्नान का सिलसिला दिन भर चलता रहा। ज्योतिषाचार्य मनोज त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष के बारह महीनों में कार्तिक मास को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान विशेष फल देने वाला है। पुराणों में कहा गया है कि यदि किसी कारणवश वर्ष भर गंगा स्नान ना कर पाएं तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से ही साल भर के गंगा स्नान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। स्नान के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने से व्यापारियों के चेहरे खिले रहे। 2020 में कोरोना के चलते लाॅकडाउन के बाद 2021 में कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर लाखों की भीड़ हरिद्वार पहुंची। लाखों श्रद्धालुओं के आने से बाजारों में खूब चहल पहल रही। स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं के खरीददारी करने से व्यापारियों को काफी लाभ भी हुआ।