तीनों कृषि कानून वापस लेने का संयुक्त किसाना मोर्चा ने किया स्वागत

 हरिद्वार। संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री द्वारा तीनो कृषि कानून वापस लेने का स्वागत करते हुए कहा है कि उचित संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा करेगा। मीडिया को जारी बयान में मोर्चा नेताओं का कहना है कि अगर मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए हैं तो यह भारत में एक वर्ष से चल रहे किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत होगी। हालांकि, इस संघर्ष में करीब 700 किसान शहीद हुए हैं। लखीमपुर खीरी हत्याकांड समेत इन टाली जा सकने वाली मौतों के लिए केंद्र सरकार की जिद जिम्मेदार है। मोर्चा नेताओं का कहना है कि मोर्चा प्रधानमंत्री को यह भी याद दिलाना चाहता है कि किसानों का यह आंदोलन न केवल तीन काले कानूनों को निरस्त करने के लिए है, बल्कि सभी कृषि उत्पाद और सभी किसानों के लिए लाभकारी मूल्य की कानूनी गारंटी के लिए भी है। किसानों की यह अहम मांग अभी बाकी है। इसी तरह बिजली संशोधन विधेयक को भी वापस लिया जाना बाकि है। बयान जारी करने वालों में बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ. दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा, युद्धवीर सिंह शामिल है। वही दूसरी ओर किसान कांग्रेस कमेटी ग्रामीण हरिद्वार ने कहा कि किसानों द्वारा चलाए गए आंदोलन के दबाव ने प्रधानमंत्री को तीनों काले कृषि कानूनों को वापस लेने को मजबूर किया है। इन कानूनों को वापस लेने के लिए जिन किसानों ने अपना बलिदान दिया है उसके लिए भाजपा सरकार दोषी है। शुक्रवार को जमालपुर राजा गार्डन में आयोजित बैठक में सभी ने काले कृषि कानूनों के वापसी की घोषणा पर खुशी जाहिर की तथा आंदोलन को संसद में बिल वापस होने तक और एमएसपी पर कानून बनाने तक आंदोलन और संघर्ष को जारी रखने पर जोर दिया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि किसानों का आंदोलन रंग लाया है। इसमे जीत उन किसानों की वजह से मिली जिन्होंने अपना बलिदान दिया है। बैठक में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष सुंदर सिंह मनवाल, ग्रामीण जिलाध्यक्ष दिनेश वालिया, प्रदेश प्रवक्ता अनुज चैधरी, प्रदेश सचिव उमेश शर्मा, मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप शर्मा, तरुण कुमार, उदयवीर सिंह चैहान, नरेश सेमवाल, अजय दास, मोनू, श्यामसुंदर, अनीश, इकराम, इदरीश, सतीश चैधरी, रमेश प्रधान आदि शामिल रहे।