वीरता, शौर्य एवं अपनी प्रदेश के लिए त्याग का त्योहार है इगास

 हरिद्वार। इगास बग्वाल पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सार्वजनिक अवकाश की घोषणा किए जाने पर मानव अधिकार संरक्षण समिति की कनखल नगर अध्यक्षा रेखा नेगी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होने कहा कि उत्तराखंड में अपनी संस्कृति और विरासत को समेटे हुए दो प्रमुख त्योहार इगास बग्वाल और घुघुतिया बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। दीपावली को यहां बग्वाल कहा जाता है, जबकि बग्वाल के 11 दिन बाद एक और दीपावली मनाई जाती है, जिसे इगास कहते हैं। पहाड़ की लोक संस्कृति से जुड़े इगास पर्व के दिन घरों की साफ-सफाई के बाद मीठे पकवान बनाए जाते हैं और देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। यह त्यौहार देवभूमि की पहचान है। इगास का त्यौहार उत्तराखंडियों की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ-साथ समृद्ध लोक संस्कृति का प्रतीक है। गढ़वाल के वीर माधो सिंह भंडारी के नेतृत्व में गढ़वाल की सेना ने दापाघाट और तिब्बत का युद्ध जीतकर विजय प्राप्त की थी और दिवाली के ठीक 11वें दिन गढ़वाल सेना अपने घर पहुंची थी। युद्ध जीतने और सैनिकों के घर पहुंचने की खुशी में उस समय दिवाली मनाई गई थी। यह त्यौहार वीरता, शौर्य एवं अपनी प्रदेश के लिए त्याग का त्योहार है। वहीं मकर सक्रांति पर मनाए जाने वाला घुघुतिया त्यौहार मुख्य रूप से प्रकृति से प्रेम का त्योहार है। ऐसी लोकप्रिय संस्कृति उत्तराखंड के अलावा कहीं और नहीं पाई जाती। किंतु हम इसका प्रचार एवं संरक्षण करने में असफल हो रहे हैं। इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।उन्होने कहा कि वह दोनों त्योहारों पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर इसके प्रचार एवं प्रसार के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाए ताकि आम जनता को इसकी जानकारी प्राप्त हो सकें।