कोरोना के कारण गणेश उत्सव को लेकर असमंजस में श्रद्धालु व मूर्तिकार

 


हरिद्वार। गणेश चतुर्थी का त्यौहार नजदीक आ रहा है। लेकिन कोविड दिशा निर्देशों के चलते पर्व का स्वरूप को लेकर श्रद्धालुओं के साथ गणेश उत्सव के लिए मूर्तियां बनाने वाले कलाकार भी असमंजस में है। धर्मनगरी हरिद्वार में प्रतिवर्ष धूमधाम से गणेश उत्सव का आयोजन किया जाता है। शहर में कई स्थानों पर बड़े-बड़े पण्डालों में आयोजित होने वाले गणेश उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। आयोजन में कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाते हैं। उत्सव के समापन पर विशाल शोभायात्रा के रूप में भगवान गणेश की मूर्ति को विसर्जन के लिए गंगा तटों पर ले जाया जाता है। लेकिन कोरोना महामारी के चलते पिछले दो वर्ष सार्वजनिक पण्डालों में गणेश उत्सव का आयोजन नहीं हो रहा है। दो वर्ष से श्रद्धालुओं द्वारा घरों में मूर्ति स्थापना कर ही गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। कोरोना के चलते इस बार भी हरिद्वार में गणेश उत्सव का प्रभावित होना लगभग तय है। कोरोना संकट को देखते हुए लोग गणेश उत्सव मनाने को लेकर असमंजस में हैं। श्रद्धालु और मूर्तिकार दोनों नहीं जानते कि इस साल गणेश उत्सव के दौरान हालात कैसे होंगे। इस स्थिति को देखते हुए मूर्तिकार सिर्फ दो से तीन फुट तक की मूर्तियां ही बना रहे हैं। गणेश उत्सव के लिए मूर्तिया तैयार करने वाले हरिद्वार के मूर्तिकार देव परीडा का कहना है कि सामान्य दिनों में हम काफी मूर्तियां बनाते थे। जिनमें भगवान गणेश की विशाल मूर्तियां भी होती थी। लेकिन इस साल अभी तक कोई ऑर्डर ही नहीं आया। जिसके बाद वे सीमित संख्या में छोटी मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। अगर कोरोना संकट के बीच गणेश उत्सव मनाया जाता है तो लोगों को बप्पा की छोटी मूर्तियों के साथ ही गणपति उत्सव मनाना होगा। मूर्तिकार कालीचरण परीडा का कहना है कि कोरोना काल से पहले मई तक मूर्तियां बनाने के 85 फीसदी ऑर्डर आ जाते थे। गणपति उत्सव शुरू होने में केवल एक सप्ताह का समय बचा है। लेकिन इस बार अभी तक कोई आर्डर नहीं मिला। जिसकी वजह से हम दो से तीन फुट तक की मूर्तियों का निर्माण सीमित मात्रा में कर रहे हैं।