प्राधिकरण की शिथिलता के कारण अवैध निर्माण जोरो पर

 हरिद्वार। धर्मनगरी में अवैध निर्माणों की बाढ़ आ गयी है। शिकायतों के बावजूद यह सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। आम लोगों द्वारा अपनी रिहाईश के लिए दो कमरों का घर बनाए जाने पर नियमों कायदों का हवाला देकर तंग करने वाले एचआरडीए के अधिकारी बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बन रही बहुमंजिली इमारतों के निर्माण पर मौन साधे हुए हैं। कुंभकर्णी नींद सो रहे अधिकारी शिकायतों का भी संज्ञान लेना जरूरी नहीं समझते। कुंभकर्णी नींद में सो रहे अधिकारी जब तक जागेंगे तब तक शहर का अधिकांश हिस्सा अवैध निर्माण की भेंट चढ़ चुका होगा। अधिकारियों की लापरवाही के चलते अवैध निर्माण करने वालों के हौसलें इतने बुलंद हैं कि गंगा तट से दौ सौ मीटर की परिधि में निर्माण पर रोक संबंधी कानून को भी मानने को तैयार नहीं है। कानून का उल्लंघन कर धड़ल्ले से गंगा की सीमा में निर्माण किए जा रहे हैं। हाल ही में जारी शासनादेश में गंगा की सीमा में कहीं भी दौ सौ मीटर के दायरे में निर्माण रोक लगायी गयी है। बावजूद इसके भूमाफिया नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिस पर विभागीय अधिकारी मौन साधे हुए हैं। अधिकारियों की चुप्पी की वजह से अवैध निर्माण को बढावा मिल रहा है। अवैध निर्माण के प्रति जागरूक लोग परेशान हैं कि शिकायत करें तो किससे करें। यही कारण है कि अवैध निर्माण करने वालों के मन से कानून का भय पूरी तरह खत्म हो गया है और वे आसानी से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। हाल ही में गंगा तट के करीब हो रहे कई निर्माण की शिकायत एचआरडीए अधिकारियों से की गयी है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से शिकायतकर्ता निराश हो रहे हैं।