105वर्षीय श्रीमहंत सोहन गिरि हुये ब्रहमलीन,जूना अखाड़ा सहित संतो में शोक की लहर


 हरिद्वार। श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े के वयोवृद्व पूर्व अन्र्तराष्ट्रीय सभापति श्रीमहंत सोहनगिरि महाराज का आज प्रातः ब्रहममुहूर्त मे ब्रहमलीन हो जाने से जूना अखाड़ा सहित समस्त संत समाज में शोक की लहर दौड़ गयी है। 105वर्षीय ब्रहमलीन श्रीमहंत सोहन गिरि पूरे संत समाज में अत्यंत लोकप्रिय थे,वह अन्तिम समय तक पूरी तरह से सक्रिय रहे और हाल में ही सम्पन्न हुये हरिद्वार महाकुम्भ 2021 में पूरी ऊर्जा व शक्ति के साथ व्यवस्थायें संभालते रहे।  जूना अखाड़े के अन्र्तराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने उन्हे श्रद्वांजलि देते हुए कहा ब्रहमलीन श्रीमहंत सोहन गिरि जूना अखाड़े की नींव के पत्थर थे,उनके जीवनकाल में अखाड़ा निरन्तर प्रगति व उन्नत्रि के नए कीर्तिमान स्थापित करता रहा। आज अखाड़े का जो विशाल स्वरूप दिखाई पड़ रहा है,यह उनकी दूरदर्शिता तथा सोच का परिणाम है। वह अपने जीवन के अन्तिम क्षणों तक सक्रिय रहे तथा अखाड़े के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते रहे।  अन्र्तराष्ट्रीय सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरि महाराज ने कहा उनका जाना एक युग का अवसान है। अपने पूरे जीवन काल में वह अखाड़े के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना से कार्य करते रहे। उन्होने बताया बहमलीन श्रीमहंत सोहन गिरि महाराज का गढ़मुक्तेश्वर स्थित ब्रजघाट स्थित सूरजगिरि आश्रम में भू-समाधि दी जाएगी। उनके अन्तिम संस्कार में भाग लेने के लिए पूरे देश से साधु संत तथा विभिन्न अखाड़ों के नागा सन्यासी महामण्डलेश्वर व अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी बृजघाट पहुच रहे है। अन्र्तराष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत मांेहन भारती,श्रीमहंत महेशपुरी,अन्र्तराष्ट्रीय प्रवक्ता दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि, अन्र्तराष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती,पूर्व सचिव श्रीमहंत चंचल गिरि,श्रीमहंत शिवानंद सरस्वती,अष्टकौशल श्रीमहंत सुरेशानंद सरस्वती,थानापति मुन्ना गिरि,महंत आजाद गिरि,महंत रणधीर गिरि आदि ने कहा कि उनके द्वारा बताये मार्ग पर चलना ही उन्हे सच्ची श्रद्वांजलि होगी। उनकी आत्मा की शांति के लिए जूना अखाड़े के सभी प्रमुख मठों,मायादेवी,भैरव मन्दिर,मौजागिरि मन्दिर प्रयागराज,बड़ा हनुमान द्वार बनारस,खेड़ामढ़ी बरेली,नीलगंगा उज्जैन,नासिक,भखनाथ मन्दिर जूनागढ़ आदि में विशेष पूजा अर्चना की जायेगी।