भाजपा कार्यकत्र्ता डाॅ0श्यामाप्रसाद मुखर्जी के आर्दशों पर चलकर पार्टी को मजबूत करें


 हरिद्वार। जिला भाजपा कार्यालय हरिद्वार पर बुधवार को जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्मृति दिवस पर जिला पदाधिकारियों के द्वारा श्रद्धांजलि दी गई। जिसका संचालन जिला महामंत्री आदेश सैनी ने किया। उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष डॉ. जयपाल सिंह चैहान ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हम सबके प्रेरणा स्रोत हैं, उनके द्वारा किए गए कार्यों को हम आत्मसात करते हुए भारतीय जनता पार्टी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का काम करेंगे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे व्यक्तित्व के लोग विरले ही होते हैं, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जीवन के 52 साल के अंतिम 14 साल राजनीति में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कोलकाता विश्वविद्यालय के सिंडिकेट केवल 23 साल की उम्र में सबसे युवा सदस्य के रूप में सम्मिलित हुए एवं 33 साल की उम्र में वे विश्वविद्यालय के उप कुलपति बने, 1934 से 1938 तक उन्होंने कुलपति के रूप में दो कार्यकालओं का निष्ठा के साथ निर्वहन किया राष्ट्रवादी विद्वानों को उन्होंने भरपूर सहयोग एवं समर्थन दिया। भारतीय इतिहास संस्कृति तथा पुरातत्व के संबंध में उनकी गहरी रुचि रही, डॉक्टर मुखर्जी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया तो उन्होंने बंगाल की मुस्लिम लीग सरकार के भयावह तौर-तरीकों के विरुद्ध संघर्ष को आगे बढ़ाया। नेहरू सरकार के गठन में उद्योग राज्यमंत्री के रूप में सम्मिलित हुए, 1950 में पाकिस्तान में हिंदुओं की दयनीय स्थिति में देखते हुए तथा नेहरू-लियाकत समझौते के विरोध में मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। नेहरू जी की जम्मू एवं कश्मीर के संदर्भ में हिंदू विरोधी एवं पाकिस्तान परस्त नीतियों के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री गुरु जी गोलवलकर जी से मिले विचार-विमर्श के उपरांत एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का संकल्प लिया। जिसमें मुखर्जी के साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बलराज माधोक, अटल बिहारी वाजपेई, कुशाभाऊ ठाकरे, नानाजी देशमुख, सुंदर सिंह भंडारी, जगदीश प्रसाद माथुर जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को राजनीतिक दल की जिम्मेदारी दी गई। जिसके फलस्वरुप भारतीय जनसंघ की स्थापना की गई। डॉक्टर मुखर्जी ने नेहरू जी से कश्मीर में परमिट एवं दो प्रधान दो निशान को दूर करने को कहा लेकिन उस समय नेहरु जी ने उसको नजरअंदाज किया, तब डॉक्टर मुखर्जी ने आंदोलन की शुरुआत करते हुए इसका विरोध करने का निर्णय लिया और बिना परमिट के ही जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया। रहस्यमय तरीके से 23 जून 1953 सुबह 3ः40 पर अंतिम सांस ली, लेकिन इस अल्पावधि की राजनीति में उन्होंने देश में एक प्रखर राष्ट्रवादी वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई और देश की एकता अखंडता के लिए संकल्प बंद होकर काम किया। हम सब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता उनके दिखाएं सिखाये मार्ग पर आगे बढ़े, उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर भारतीय जनता पार्टी को नई ऊंचाई तक ले जाने का काम करें। डॉक्टर मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि देने वालों में प्रदेश सहमीडिया प्रभारी सुनील सैनी, जिला उपाध्यक्ष देशपाल रोड, अनिल अरोड़ा, संदीप गोयल, अंकित आर्य, जिला मंत्री मनोज पवार, जिला कार्यालय प्रभारी लव शर्मा, सोशल मीडिया प्रभारी मोहित वर्मा, आईटी प्रभारी सुशील रावत, विकास प्रजापति, ओबीसी मोर्चा जिला अध्यक्ष प्रदीप पाल, अनुसूचित मोर्चा जिला अध्यक्ष तेलूराम चनालिया, डॉ. प्रदीप चैधरी आदि उपस्थित रहे।