बैरागी अखाड़ो की पेशवाई 6 अप्रैल को निकाली जायेगी,11सौ से अधिक खालसे होंगे शामिल

 हरिद्वार। बैरागी संतो के तीनो अखाड़े की पेशवाइ्र एक साथ निकाली जायेगी। पेशवाई 6 अप्रैल को भुपतवला से प्रारम्भ हेाकर बैरागी कैम्प पहुचेगी। इस दौरान हेलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा की जायेगी। साथ ही अखाड़ो के खालसों की ओर से विभिन्न प्रकार के करतब भी प्रदर्शित किये जायेगे। मेला प्रशासन की ओर से बैरागी कैंप क्षेत्र में बैरागियों को लेकर की जाने वाली व्यवस्थाओं पर संतो ने नाराजगी जताई है। साथ ही अखाड़़ा परिषद को लुटेरी संस्था बताते हुए कहा है कि केवल करोड़ो का लेन-देन करने के लिए संस्था बनी है। शनिवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बाबा हठायेगी,महंत दुर्गादास,महंत बिष्णुदास,महंत प्रहलाद दास,महंत प्रेम दास और महंत प्रमोद दास ने संयुक्त रूप से कहा कि 6 अप्रैल को बैरागियों के तीनों अखाड़े एक साथ पेशवाई निकालेंगे। जिसमें बैंड बाजों से ज्यादा लोगों को संतों के दर्शन होंगे। उन्होंने अपर मेलाधिकारी हरबीर सिंह के साथ की गई अभद्रता को सरासर गलत करार दिया। दिगंबर अणि अखाडे सचिव प्रतिनिधि बाबा हठयोगी ने अखाड़ा परिषद पर कई आरोप लगाए। कहा कि जो कुंभ 2022 में हो सकता था कोरोना महामारी फैलने के बावजूद उसे जानबूझकर 2021 में किया गया। मेला प्रशासन को पता था कि होली के बाद बैरागी संत मेले में प्रवेश करेंगे। बावजूद इसके अभी तक व्यवस्थाएं नहीं की गयीं। अखाड़ा परिषद अपनी सुविधा के अनुरूप व्यवस्थाएं करवा रही है और अधिकारी उनके अनुरूप चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी जो दिन रात संतों के बीच व्यवस्थाएं जुटाने पर लगा हुआ है। ऐसे अधिकारी के साथ किसी भी साधु द्वारा मारपीट करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने आशा जताई कि भले अब तक बैरागी कैंप क्षेत्र में व्यवस्थाएं पूरी ना हुई हों, लेकिन आने वाले एक सप्ताह में मेला प्रशासन व्यवस्थाएं पूरी कर देगा। बाबा हठयोगी ने कहा कि 6 अप्रैल को बैरागी संप्रदाय के तीनों अखाडों की पेशवाई भव्य रूप में उत्तरी हरिद्वार से लेकर नगर भ्रमण करते हुए बैरागी कैंप क्षेत्र में प्रवेश करेगी। इस दौरान श्री रामानंदीय वैष्णव मण्डल की ओर से पेशवाई पर 3 घंटे तक हेलीकॉप्टर द्वारा फूलों की वर्षा करायी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारी पेशवाई में ढोल बाजे का शोर नहीं बल्कि जनता को संतों के दर्शन होंगे। पेशवाई में तीनों अखाड़ों के करीब 11 सौ खालसे भाग लेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में संत शामिल होंगे।