मन की शुद्धि के लिए श्रीमद्भागवत से बड़ा कोई साधन नहीं है- म.म.स्वाामी बालकानंद

हरिद्वार। आनन्द पीठाधीश्वर आचार्य म.म.स्वाामी बालकानंद गिरी महाराज ने कहा है कि भगवत सत्ता में ही जीवन का आनंद है और श्रीमद्भागवत कथा साक्षात भगवान का स्वरूप है। इसके श्रवण मात्र से भोग एवं मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। भूपतवाला स्थित हरिधाम सनातन सेवा ट्रस्ट आश्रम में आयोजित आॅनलाईन श्रीमद्भावगत कथा के विश्राम अवसर पर श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने कहा कि मन की शुद्धि के लिए श्रीमद्भागवत से बड़ा कोई साधन नहीं है। भागवत कथा के श्रवण से कलियुग के समस्त दोष नष्ट हो जाते हैं और श्रीहरि हृदय में आ विराजते हैं। उन्होंने कहा कि हजारों अश्वमेघ और वाजपेय यज्ञ कथा का अंश मात्र भी नहीं है। फल की दृष्टि से भागवत की समानता गया, काशी, पुष्कर एवं प्रयाग कोई भी तीर्थ नहीं कर सकता। इसलिए यदि परमात्मा की प्राप्ति करनी है तो भागवत कथा ही एकमात्र साधन है। मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि जिस स्थान पर भागवत कथा का आयोजन होता है। वह तीर्थ रूप हो जाता है। भागवत से जो फल अनायास ही सुलभ हो जाता है। वह अन्य साधनों से दुर्लभ ही रहता है। कथा व्यास आचार्य राजेश कृष्ण वृन्दावन वाले ने कहा कि कोरोना काल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा से विश्व में धार्मिक ऊर्जा का संचार अवश्य मानव हित में होगा। बच्चों को संस्कारवान बनाकर भागवत कथा श्रवण के लिए प्रेरित करना चाहिए। व्यक्ति सत्य के मार्ग पर अग्रसर रहकर अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इस अवसर पर श्रीमहंत सत्यानन्द गिरी, आचार्य मनीष जोशी, स्वामी सोनू गिरी, स्वामी नत्थीनंद गिरी, आचार्य मनीष जोशी, महेश योगी, सुनील दत्त नंदकिशोर, सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।