समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो काम बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा-अमित अग्रवाल

पेयजल योजनाओं में लगने वाली निर्माण सामग्री की बढ़ी दरों को पुर्ननिर्धारित करने की मांग 


 हरिद्वार।   देवभूमि जल शक्ति कॉन्टेªक्टर वेलफेयर एसोसिएशन सोसाइटी ने सरकार से समस्याएं दूर करने की मांग की है। इस सम्बन्ध मे देवभूमि जल शक्ति कॉन्ट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन सोसाइटी ने पत्रकारो से वार्ता करते हुए सरकार द्वारा निर्माण सामग्री का दाम नही बढ़ाए जाने पर आपत्ति जताई। बढ़ती महंगाई के चलते ठेकेदारों के सामने काम करना मुश्किल हो गया है। अमित अग्रवाल ने बताया कि निर्माण सामग्री की दरें 40 फीसदी तक बढ़ गयी हैं। ऐसे में बढ़ी हुई कीमतों के अनुसार योजनाओं में लगने वाली निर्माण सामग्री की दरें पुर्ननिर्धारित की जाएं। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में लागू एक्लेशन क्लाॅज का प्रावधान उत्तराखण्ड में भी लागू किया जाए। एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने ने बताया कि पिछले 3 महीनों में महंगाई ने ठेकेदारों की कमर तोड़ दी है ऐसे में ठेकेदारों का काम करना मुश्किल होता जा रहा है जिस संबंध में सोसाइटी के सदस्यों द्वारा माननीय मुख्यमंत्री, पेयजल मंत्री से भी वार्ता कर चुके हैं जिन्होंने 1 सप्ताह का समय दिया गया था लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की गई है अगर ऐसा ही चलता रहा तो सारे ठेकेदारों को कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लेने पर बाध्य होना पड़ेगा जिससे पूरे उत्तराखंड प्रदेश में लगभग 14 सौ करोड़ रुपए के पेयजल प्रोजेक्ट अधर में लटक जाएंगे। उन्होंने कहा कि महंगाई को देखते हुए प्रोजेक्ट कॉस्ट को भी बढ़ाना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने हर घर जल हर घर नल की योजना चलाई है उनका लक्ष्य है की आज गांव गांव और पहाड़ों में प्रत्येक लोगों के घरों के सामने नल और जल का लक्ष्य रखा गया है। जिससे कि सभी लोगों को स्वच्छ जल मिल सके। लेकिन मोदी जी की इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा की गई महंगाई में कॉन्ट्रैक्टर को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस अवसर पर कांट्रेक्टर त्रिलोक रावत एवं सौरभ गोयल ने कहा कि सरकार द्वारा थर्ड पार्टी जांच भी रखी गई है लेकिन ठेकेदरों का इसका कोई विरोध नहीं है लेकिन यह जांच लगभग 15 दिन या 1 महीने के अंदर हो जानी चाहिए। प्राय देखा जाता है कि थर्ड पार्टी जांच 6 महीनों बाद तक होती रहती है जिससे ठेकेदारों का सारा पैसा डंप हो जाता है। एक अनुबंध के दौरान भी 10ः शुल्क जमा किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो ठेकेदारों के सामने काम बंद करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचेगा। प्रैसवार्ता में सचिव सुनील गुप्ता, उपाध्यक्ष सचिन मित्तल, कोषाध्यक्ष सौरभ गोयल, कानूनी सलाहकार मुबारक अली, प्रचार मंत्री रामचंद्र कन्नौजिया सहित एसोसिएशन के सदस्य मौजूद रहे।