मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे

 हरिद्वार। इन्टरनेशनल गुडविल सोसायटी ऑफ इंडिया हरिद्वार चेप्टर के अध्यक्ष ई मधुसूदन आर्य ने वर्चुअल मीटिंग में प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम 1857की क्रांति के अग्रदूत, माँ भारती की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण अर्पित करने वाले निर्भीक क्रान्तिकारी नायक मंगल पाण्डेय के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा की अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने पहली चुनौती पेश करने वाले मंगल पांडे का जन्म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था। मंगल पांडे का नाम ‘भारतीय स्वाधीनता संग्राम‘ में अग्रणी योद्धाओं के रूप में लिया जाता है, जिनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे। प्रांतीय उपाध्यक्ष जगदीश लाल पाहवा ने कहा कि मंगल पांडे पहले शख्स थे, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया था। अंग्रेजों ने 15 दिनों के भीतर उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया लेकिन उन्होंने उनकी चिंगारी ऐसी आग जरूर बन गई, जिसने आने वाले समय में अंग्रेजों के लिए लगातार मुश्किल खड़ीं की। डॉ सुनील बत्रा ने कहा कि भारत के इतिहास में मंगल पांडे का नाम स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया है। मंगल पांडे एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। वह पहले ऐसे स्वतंत्रता क्रांतिकारी थे, जिन्होंने ब्रिटिश कानून का विरोध किया था। विमल कुमार गर्ग ने कहा कि मंगल पांडे को प्रथम स्वाधीनता संग्राम का जनक भी कहा जाता है। इनके द्वारा लगाई गई विरोध की चिंगारी ने देखते ही देखते एक भयंकर रूप ले लिया और ब्रिटिश सरकार के तख्तों ताज को हिला कर रख दिया।इस अवसर पर डॉ पवन सिंह,प्रवीण अग्रवाल, अंजली माहेश्वरी, प्रमोद शर्मा,सुरेश चन्द्र गुप्ता,यू के गुप्ता ने भी विचार व्यक्त किए तथा कमला जोशी,रेखा नेगी,अन्नपूर्णा बंधुनी, प्रभात आर्य, हेमंत सिंह नेगी, डॉ पंकज कौशिक उपस्थित रहे।