स्वयं जमीन से जुड़कर ही बचा सकेंगे जल और जंगल-कल्याण सिंह रावत

 हरिद्वार। मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत ने कहा कि जल और जंगल को तभी बचा सकेंगे जब हम स्वयं जमीन से जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमें पर्यावरण संरक्षण कर पृथ्वी की प्यास बुझानी होगी। यह बात उन्होंने बुधवार को एसएमजेएन पीजी कॉलेज में उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं शोध केंद्र देहरादून और एसएमजेएन कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही। कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें उत्तराखंड के विशेष संदर्भ में जल संरक्षण के लिए किये जा रहे प्रयासों और तकनीकों से जागरूक किया गया। श्री महंत रविंद्र पुरी द्वारा सभी अतिथियों को हरित पौधा तथा गौरैया गृह भेंट किया गया। कल्याण सिंह रावत ने कहा कि भारत की 42 प्रतिशत आबादी गंगा पर निर्भर है। ये नदियां भी तब तक हैं जब तक हिमालय राज जिन्दा हैं। उन्होंने उपस्थित सभी से पर्यावरण संरक्षण करने का आह्वान किया। प्रसिद्ध पर्यावरणविद प्रो. बीडी जोशी ने कहा कि जल संरक्षण के लिए हमें प्रकृति की प्रत्येक वस्तु का संरक्षण करना चाहिए। जीवन की दिनचर्या में जल का उचित प्रयोग करके जल संरक्षण का किया जा सकता है। सामाजिक स्तर पर भी व्यक्ति को जल संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। डीएवी कॉलेज के डा. पुष्पेंद्र शर्मा ने कहा कि हमारी जीवन की पूरी दिनचर्या ही जल से प्रारंभ होकर जल पर ही समाप्त होती है। जल की सुरक्षा हमारे घर से ही प्रारंभ होती है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के अरुणेश पाराशर ने जल संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि पृथ्वी पर जल की मात्रा दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। जल का संचय विभिन्न माध्यमों से किया जा सकता है जिसमें वर्षा जल के संचय द्वारा, तालाबों की जलधारण क्षमता में वृद्धि, अनुकूलतम जल संसाधन उपयोग हेतु जागरूकता, जल स्रोतों के समीप ट्यूबवेल आदि के निर्माण पर रोक, जलोपचार आदि मुख्य हैं। एसएमजेएन कालेज के प्राचार्य डा. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि अगर जल का सही संचय नहीं किया गया तो यह सृष्टि के विनाश का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि जल की महत्ता के कारण मनुष्य इसे सहेजकर रखने के लिए बांध, झील, तालाबों एवं इसी प्रकार के विविध प्रयास करता है। कार्यशाला को मदरहुड यूनिसर्विटी के अभिषेक स्वामी ने भी संबोधित किया। कार्यशाला में मुख्य रूप से डा. मन मोहन गुप्ता, डा. सरस्वती पाठक, डा. जगदीश चन्द्र आर्य, डा. विनीता चैहान, डा. दीपा अग्रवाल, डा. मधु, डा. ऋचा चैहान, डा. धर्मेन्द्र कुमार, रिंकल गोयल, डा. शिवकुमार चैहान, डा. मनोज कुमार सोही, डा. पदमावती तनेजा, डा. पूर्णिमा सुन्दरियाल, प्रियंका प्रजापति, डॉ. सरोज शर्मा, डा. लता शर्मा आदि शामिल रहे।