तीन व्यापारी संगठनों ने व्यापारी नेता के लिए पार्टी से की टिकट की मांग

 


हरिद्वार। विधानसभा चुनाव की विधिवत घोषणा के बाद से हर संगठन राजनीतिक पार्टियों को अपनी शक्ति का प्रदर्शन करता दिखाई दे रहा है। इस दौड़ में अब व्यापारी नेता भी शामिल हो गए हैं। हरिद्वार के तीन व्यापारी संगठनों ने एक साथ आकर राजनीतिक पार्टियों से मांग की है कि वे व्यापारी नेता को पार्टी से टिकट दे और संगठनों का यह भी कहना है कि व्यापारी संगठन उस राजनीतिक पार्टी का सहयोग करेंगे जो व्यापारियों के हित के लिए व्यापारी नीति आयोग के गठन की बात कहेगा। हरिद्वार शहर के तीन अलग-अलग व्यापारी संगठन जिसमें प्रदेश व्यापार मंडल प्रांतीय उद्योग प्रतिनिधि व्यापार मंडल एवं महा नगर व्यापार मंडल शामिल थे के लोगों ने संयुक्त रूप से मंगलवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए सभी राजनीतिक पार्टियों से व्यापारी नेता को टिकट देने की मांग की। साथ ही राजनीतिक पार्टियों से मांग की कि वे अपने मेनिफेस्टो में व्यापारियों के हितों के लिए व्यापार आयोग के गठन की बात को शामिल करें। वार्ता करते हुए प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय चैधरी ने कहा कि पिछले लगभग 2 साल से कोरोना संक्रमण के चलते हैं व्यापारी खासा नुकसान झेल रहा है और उसकी बात को समझने वाला आज संसद और विधानसभा में कोई नहीं है अगर एक व्यापारी नेता संसद या विधानसभा में होगा तो व्यापारियों की बात वहां पर अच्छे से रखी जा सकेगी। इसलिए व्यापारियों ने यह तय किया है कि जो राजनीतिक पार्टी व्यापारी नेता को टिकट देगी सभी व्यापारी संगठन उस पार्टी को समर्थन देंगे और अगर राजनीतिक पार्टियां उनकी मांग को नहीं मानती है तो व्यापारिक संगठन अपने किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़ाएगी। प्रेस वार्ता में महानगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुनील शेट्टी ने कहा कि जो भी पार्टी अपनी मेनिफेस्टो में व्यापारियों के हितों के लिए व्यापारी नीति आयोग के गठन की बात को रखेगा सभी व्यापारी संगठन उस पार्टी का समर्थन करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना का हाल में जो मुकदमे व्यापारियों पर किए गए हैं उनको भी जो पार्टी वापस लेने की बात कहेगी व्यापारी संगठन उस पार्टी का समर्थन करेंगे। उद्योग प्रतिनिधि व्यापार मंडल के सदस्य मृदुल कौशिक ने दोहराया कि जो भी राजनीतिक दल व्यापारी हितों के लिए व्यापारी नीति आयोग के गठन की बात कहेगा सभी संगठनों का साथ देंगे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने मकर संक्रांति के स्नान को जिस तरह से प्रतिवेदन किया है वह व्यापारियों के हितों के साथ नाइंसाफी है उन्होंने मांग की कि प्रशासन को चाहिए था कि प्रतिबंधों के साथ मकर संक्रांति के स्नान को कराया जाए।