गाय, गंगा और गायत्री सनातन धर्म का आधार-स्वामी विज्ञानानन्द


 हरिद्वार। महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा है कि गाय ,गंगा और गायत्री सनातन धर्म के आधार हैं और गंगा तट पर गौ सेवा तथा गायत्री पाठ करने वाले का जीवन सार्थक,समृद्धशाली ,सुखी और शांतिमय हो जाता है। वे आज राजागार्डन स्थित श्री हनुमत गौशाला में आयोजित खिचड़ी समारोह के अवसर पर गायों को गुड़ खिला रहे थे।  श्री गीता विज्ञान आश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित हनुमत गौशाला को धर्म नगरी का प्रमुख गौसेवा केंद्र बताते हुए उन्होंने कहा कि गाय सृष्टि का सर्वाधिक उपयोगी जीव है। इसीलिए गाय को माता की उपाधि दी गई है । खिचड़ी महोत्सव में पधारे भक्तों को गौसेवा का महत्व समझाते हुए उन्होंने कहा कि देशी गाय के दूधघृत, गोमूत्र और गोबर में अद्भुत शक्तियों का भंडार है। गाय में 33 प्रकार के देवताओं का वास बताते हुए उन्होंने कहा कि देशी गाय ही सृष्टि का एकमात्र ऐसा जीव है जिसके गले से नीचे उतरने वाला प्रत्येक पदार्थ अमृततुल्य हो जाता है। गौ दुग्ध और गौघृत को स्वास्थ्य के लिए सर्वाधिक उपयोगी बताते हुए उन्होंने कहा कि गौमूत्र और गाय का गोबर भी कृषि एवं मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी होता है । श्रीहनुमत गौशाला में अनवरत चलने वाली गौसेवा को समाज के लिए उपयोगी बताते हुए उन्होंने बताया कि जो भक्त नियमित गौसेवा करते हैं। उनके परिवारों में सुख और शांति का समावेश हो जाता है, ऐसा प्राचीन काल से होता आया है और माता बहने रसोई पकाने के बाद पहला ग्रास (हिस्सा) गाय का निकाल कर रखती थीं। जबकि अंतिम ग्राश कुत्ते को दिया जाता है। उन्होंने सभी गौ सेवकों, भक्तों को गौसेवा का संदेश देते हुए कहा कि परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं है । प्रत्येक जीवधारी को एक दूसरे के साथ दया एवं परस्पर सहयोग का वातावरण बनाना चाहिए।