पुलिस कास्टेबलों के चुनाव कार्य बहिष्कार की चेतावनी की जाॅच सीओ सिटी को सौंपी

 हरिद्वार। शासन द्वारा 4600 ग्रेड पे की मांग पूरी नही होने पर कथित तौर पर चुनाव ड्यूटी बहिष्कार की चेतावनी दे रहे पुलिसकर्मियों के सुर अब बदल गए हैं। मामले के सामाने आने के बाद पुलिस महकमे के आला अफसरों के सक्रिय होने पर पुलिसकर्मियों ने एकत्रित होने के पीछे कानूनी राय-मशविरा करने का तर्क दिया है। सोमवार को दिनभर पुलिस अफसर कांस्टेबलों को समझाने में जुटे दिखे। वहीं, डीआईजी-एसएसपी डॉ योगेंद्र सिंह रावत ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच सीओ सिटी शेखर सुयाल को सौंप दी है। दरअसल पिछले काफी समय से ग्रेड पे की मांग कर रहे पुलिसकर्मियों शासन ने ग्रेड पे के बजाय एकमुश्त दो-दो लाख की रकम देने के ऐलान से वर्ष 2001 बैच के पुलिसकर्मियों में खासा आक्रोश पनप रहा है। सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मी अपनी राय खुलकर रख रहे हैं। वहीं अंदरखाने अपने व्हाट्सऐप ग्रुपों पर इस्तीफे से लेकर तमाम तरह की चेतावनी राज्य सरकार को देने में जुटे हैं। रविवार को 2001 बैच के कई पुलिसकर्मी ऋषिकुल क्षेत्र में एकित्रत हुए थे। गुस्से का इजहार करते हुए राज्य सरकार की तरफ से मिलने वाली दो-दो लाख की रकम वापस लौटाने की बात कही थी। उनका कहना था कि राज्य सरकार ने उन्हें छला है और वह चुनाव ड्यूटी के बहिष्कार से भी पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि कांस्टेबलों ने इस बाबत कोई बयान नहीं जारी किया था लेकिन सूत्रों मुताबिक मौके पर उनके बीच इन्हीं मुददों को लेकर विचार-विमर्श हुआ था।कांस्टेबलों के आक्रोश की बात सामने आने पर देहरादून तक के आला अफसर सक्रिय हो गए थे। सोमवार को अफसरों ने नाराज चल रहे कांस्टेबलों से जब संवाद किया तब कांस्टेबलों ने तर्क दिया कि वह कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए राय-मशविरा करने के लिए एकत्र हुए थे, उन्होंने चुनाव ड्यूटी बहिष्कार की बात नहीं कही है। अलग-अलग अधिकारियों ने कांस्टेबलों को बुलाकर समझा-बुझाकर उनका गुस्सा शांत किया। डीआईजी-एसएसपी डॉ योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि नियमानुसार कांस्टेबल चुनाव ड्यूटी का बहिष्कार नहीं कर सकते हैं। इस तरह की बात कांस्टेबलों ने प्रारंभिक बातचीत के दौरान नही करने की बात कही है। पूरे मामले की जांच सीओ सिटी शेखर सुयाल को सौंपी गई है।