हिंदी वैश्विक स्तर पर विमर्श की भाषा बन गई है

 हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में हिन्दी माह के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी में अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. केएस डहेरिया ने कहा कि हिंदी वैश्विक स्तर पर विमर्श की भाषा बन गई है और जल्द ही हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनेगी। उन्होंने कहा कि बाजार तथा व्यवसायिक कारणों से हिंदी समृद्ध होती जा रही है। विश्व के 125 देशों के लोग किसी न किसी रूप में हिंदी को समझते, पढ़ते या हिंदी में लिखते हैं। विश्व बाजार को अगर भारत में आना है तो उसे हिंदी अपनानी होगी क्योंकि यहां की बहुसंख्य आबादी हिंदी भाषी है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने राष्ट्रभाषा हिंदी के रूप में इसके महत्त्व व दीर्घकालीन उपयोग पर प्रकाश डाला। इससे पहले गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए आधुनिक ज्ञान-विज्ञान संकाय के डीन, प्रो. दिनेश चंद्र चमोला ने कहा कि हिंदी अपने गौरवशाली अतीत से लेकर आज विश्व में अपने वर्चस्व व क्षमता का लोहा मनवाती रही है। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने कहा कि हमें व्यवहारिक रूप में भी हिंदी को पूर्ण रूप से अपनाने का संकल्प लेना होगा। गोष्ठी में डॉ शैलेश तिवारी, डॉ बिंदुमती द्विवेदी, डॉ श्वेता अवस्थी, डॉ संजय त्रिपाठी, डॉ अनीता चैबे, डॉ कमलिनी, डॉ रश्मि चतुर्वेदी, सुशील चमोली, मनमीत कौर, शोध छात्र अनूप बहुखंडी, ललित शर्मा, अन्य छात्र छात्राएं चित्रा पटेल, सविता, नीलम तिवारी, रितु श्रीवास्तव, नीलू वर्मा, निशा शर्मा आदि शामिल रही।