योग एवं अध्यात्म से सभी समस्याओं का समाधान सम्भवः साध्वी डाॅ. देवप्रिया

 हरिद्वार। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित योग सप्ताह के तृतीय दिवस की परिचर्चा वैदिक मन्त्रोचारण के साथ प्रारम्भ हुई। कार्यक्रम के आयोजन सचिव स्वामी परमार्थदेव ने मूर्धन्य विद्वानों का परिचय एवं स्वागत करने के साथ अधिक-से-अधिक प्रतिभागियों को इस ज्ञान-गंगा के माध्यम से जुड़ने की प्रेरणा दी। परिचर्चा के प्रथम सत्र को भारत स्वाभिमान संगठन की मुख्य महिला केन्द्रीय प्रभारी एवं पतंजलि विश्वविद्यालय की कुलानुशासिका डाॅ. साध्वी देवप्रिया ने सम्बोधित किया। उन्होंने उच्च-स्तरीय चेतना से सम्पन्न महापुरुषों महात्मा बुद्ध, अरविन्द, स्वामी दयानन्द, स्वामी विवेकानन्द से लेकर शून्य से शिखर तक की यात्रा करने वाले योग ऋषि स्वामी रामदेव के पुरुषार्थ का उदाहरण देते हुए अपने जीवन में योग व अध्यात्म का समावेश करने की प्रेरणा दी। हमारा जीवन शुचितापूर्ण हो, इसके लिए उन्होंने योग की शरण में आने हेतु प्रतिभागियों को अभिप्रेरित किया। पतंजलि वि.वि. के योग विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डाॅ0 निधीश यादव ने कर्म, कर्माशय की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए स्थूल एवं सूक्ष्म शरीर के वैज्ञानिक अन्तर्सम्बन्धों पर प्रकाश डाला। मनोविज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. अभिषेक भारद्वाज ने अपने व्याख्यान में आत्मनिरीक्षण के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए प्रतिभागियों से दैनिक जीवन में स्वाध्याय एवं सकारात्मक चिंतन करने का अनुरोध किया। इसी क्रम में डाॅ. निवेदिता ने कायाकल्प के लिए सी.बकथाॅर्न बेरी के अनुप्रयोग पर चर्चा की। योग विज्ञान विभाग की सहायक आचार्या डाॅ. आरती यादव ने विभिन्न रंगों का व्यक्तित्व पर पड़ने वाले प्रभाव की उपयोगी व्याख्या प्रस्तुत की।


परिचर्चा के अन्तिम वक्ता के रूप में सत्वतोव संस्थान, फ्लोरिडा के अध्यक्ष डाॅ. डेविड बी वोल्फ ने अपना संबोधन देते हुए उपनिषद् के संदर्भ में योग-स्वानवेषण की अवधारणा की विषद् व्याख्या की। कार्यक्रम के मध्य में पतंजलि गुरुकुलम् के विद्यार्थियों द्वारा जटिल योगासनों की प्रस्तुति दी गई। तृतीय दिवस का संचालन योग विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. निधीश यादव ने किया तथा स्वामी परमार्थदेव ने इस परिचर्चा का समापन शान्तिपाठ की दिव्य ध्वनि से किया।