किसी को नहीं दी जा सकती चैदहवें अखाड़े की मान्यता-हिमांगी सखी

 


हरिद्वार। अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े की हिमांगी सखी ने किन्नर समाज द्वारा स्वयं को किन्नर अखाड़ा बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। बैरागी कैंप स्थित श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े में उन्होंने पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि अनादि काल से अखाड़े सिर्फ तेरह हंै और तेरह ही रहेंगे। अखाड़े के रूप में किसी को भी मान्यता प्रदान नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि किन्नर भी समाज का अंग है। परंतु परंपराओं के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। जब किन्नर समाज को संत समाज द्वारा अपना लिया गया है और किन्नर संत सन्यासी संतों के साथ शाही स्नान भी कर रहे है,ं तब उन्हें अपना अलग से अखाड़ा बनाने की क्या आवश्यकता है। किन्नर समाज संत समाज के साथ सहयोग कर सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने में जुटे। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को 14वां अखाड़ा बनाने की क्या आवश्यकता है। इसका जवाब जूना अखाड़े को भी देना चाहिए। जब जूना अखाड़े ने किन्नर समाज को अपनाया है अपने हृदय में स्थान दिया है। जूना अखाड़ा अपने आप में बहुत बड़ा अखाड़ा है। किन्नर समाज को किन्नर अखाड़ा लिखने की आवश्यकता नहीं है। श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज ने कहा कि आद्य जगद्गुरू शंकराचार्य ने जिन तेरह अखाड़ों की स्थापना की है। उनके द्वारा भलीभांति परंपरांओं का निर्वहन करते हुए समाज का मार्गदर्शन किया जा रहा है। परंपरांओं से किसी भी प्रकार की छेड़खानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महामंडलेश्वर सांवरिया बाबा ने कहा कि चैदहवें अखाड़े के रूप में किसी भी समाज को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। महामंडलेश्वर सांवरिया बाबा ने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि आगामी 10 अप्रैल को उन्हें अखिल भारतीय श्री चतुर संप्रदाय का गद्दी नशीन अध्यक्ष बनाया जाएगा। सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरुष की उपस्थिति में धूमधाम के साथ उनका पट्टा अभिषेक समारोह संपन्न होगा। इस अवसर पर महंत नरेंद्र दास, महंत महेश दास, महंत संत दास, हंस पीठाधीश्वर महंत रामचरण दास, महंत रामजी दास, महंत भगवान दास खाकी, महंत मोहनदास खाकी, म.म.सांवरिया बाबा, महंत रामकिशोर दास शास्त्री महंत राघवेंद्र दास, महंत रामदास, महंत रामशरण दास, महंत हिटलर बाबा, महंत सुखदेव दास, महंत अगस्त दास, महंत सिंटू दास आदि मौजूद रहे।