नवसंवत्सर के मौके पर श्रद्वालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी,चैत्र नवरात्रा प्रारम्भ

 

हरिद्वार। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के यानि नवसंवत्सर के मौके पर स्नान पर्व के मौके पर बड़ी  संख्या में श्रद्धालुओं ने हर की पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर गंगा में डुबकी लगाई। गंगा स्नान के बाद विभिन्न मन्दिरों में पूजा अर्चना कर सुख-समृद्वि की कामना की। इस दौरान नगर के विभिन्न शक्तिपीठों मे श्रद्वालुओं की भीड़ लगी रही। नवसवंत्सर के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी और अन्य घाटों पर श्रद्धा और आस्था की पावन डुबकी लगाई। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मन्दिरों में विशेष पूजा अर्चना कर सुख-समृद्वि की कामना की। इस बार बैशाखी के साथ नवसंवत्सर यानि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन भी गंगा घाटों पर अपेक्षाकृत श्रद्वालुओं की संख्या कम रही। जबकि वर्ष 2010 के कुंभ में इस दिन हरिद्वार में 70 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किये थे। गत दिवस सोमवार को सोमवती अमावस्या के मौके पर प्रथम शाही स्नान के बाद मंगलवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का स्नान हुआ। बहरहाल मंगलवार को सुबह ही हर की पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर श्रद्वालुओं ने गंगा में डुबकी लगाते हुए सुख-समृद्वि की कामना की। कुम्भ मेला पर्व के दौरान इस स्नान पर्व में उत्तराखंड के अलावा हिमाचल, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली से आए श्रद्धालुओं ने दिनभर ब्रह्मकुंड, मालवीय द्वीप, सुभाष घाट, नाई सोता घाट समेत सभी गंगा घाटों आस्था की डुबकियां लगाई। गंगा घाटों में कम ही भीड़ नजर आई। हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाये तो पिछले कुम्भ यानि वर्ष 2010 के कुंभ में इस दिन हरिद्वार पूरी तरह पैक था। लेकिन 11 वर्ष बाद जारी कुम्भ मेला 2021 में कोरोना महामारी और प्रशासन की ओर से की गई सख्ती इस भीड़ के कम होने का कारण मानी जा रही है। वही दूसरी ओर चैत्रनवरात्रा के प्रथम दिन नगर के विभिन्न शक्तिपीठों में श्रद्वालुओं के द्वारा पूजा अर्चना की गयी। अधिष्ठात्री देवी मायादेवी,मंशादेवी,चण्डीदेवी,दक्षेश्वर महादेव मन्दिर सहित विभिन्न प्रसिद्व मन्दिरों में श्रद्वालुओं ने पूजा अर्चना कर सुख-समृद्वि,शांति की कामना की।