निहित उपदेशों को जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है- स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती

 हरिद्वार। महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा पतित पावनी मां गंगा की भांति बहने वाली ज्ञान की अविरल धारा है। जिसे जितना ग्रहण करो उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती है। कथा के प्रत्येक सत्संग से अतिरिक्त ज्ञान की प्राप्ति होती है। सन्यास रोड स्थित श्री रामेश्वर सदानंद आश्रम चैरिटेबल ट्रस्ट में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालु भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि धर्म ग्रंथों में निहित उपदेशों को जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है। इससे ना केवल हम स्वयं का बल्कि समाज का कल्याण कर सकते हैं। भगवान श्री कृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतार कर हम परम उत्कर्ष को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में युवा पीढ़ी को धर्म के मार्ग पर अग्रसर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई भक्ति से प्रभु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। भक्तों के संरक्षक के रूप में भगवान सदैव उनके आसपास विराजमान रहते हैं और जब भी कोई विपदा आती है तो वे उसकी तत्क्षण सहायता करते हैं। स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण करने मात्र से ही व्यक्ति की सारी बाधाएं दूर हो जाती है और उसके जीवन में सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि का वास होता है। इसलिए व्यक्ति को सदैव सच्चाई के रास्ते पर चलकर प्रभु भक्ति में लीन रहना चाहिए। क्योंकि प्रभु की शरण में रहकर ही भक्तों का कल्याण संभव है।