बुद्धि प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका है मां सरस्वती-स्वामी अयोध्याचार्य

 हरिद्वार। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य महाराज ने कहा है कि ब्रह्म विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती बुद्धि प्रज्ञा तथा मनोवृतियों की संरक्षिका है। व्यक्ति के भीतर जो आचार और मेधा है। उसका आधार मां सरस्वती ही है। वसंत पंचमी के दिन जो व्यक्ति मां सरस्वती की विशेष आराधना करता है उनको ज्ञान विद्या कला में चरम उत्कर्ष की प्राप्ति होती है। भूपतवाला स्थित नरसिंह धाम यज्ञशाला में बसंत पंचमी पर आयोजित मां सरस्वती के पूजन अवसर पर श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी अयोध्याचार्य महाराज ने कहा कि मां सरस्वती को साहित्य कला एवं संगीत की देवी माना जाता है। जिनमें विचारण भावना एवं संवेदना का त्रिविध समन्वय है। इसलिए शिक्षा की गरिमा बौद्धिक विकास की आवश्यकता जन-जन को समझाने के लिए मां सरस्वती की पूजा अर्चना अत्यंत आवश्यक है। महंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान की प्राप्ति असंभव है। व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हो उसे गुरु की आवश्यकता पड़ती ही है। आज प्रत्येक व्यक्ति को अपने संरक्षक के रूप में एक गुरु की आवश्यकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुरु के बताए मार्ग का अनुसरण कर राष्ट्र कल्याण में अपना अहम योगदान प्रदान करना चाहिए। साध्वी जयश्री व साध्वी विजय लक्ष्मी ने कहा कि मां सरस्वती की अनुकंपा से कुंभ मेला दिव्य और भव्य तथा निर्विघ्न संपन्न होगा।