अभिमानी व्यक्ति का कोई मित्र नहीं हो सकता-कथा व्यास सुशील कुमार पाठक

 हरिद्वार। अभिमान व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है। अभिमानी व्यक्ति का कोई मित्र नहीं हो सकता। अभिमान के वशीभूत होकर वह अनैतिक कार्य करता है। इसके चलते उसे अकेले ही रहना पड़ता है और अपमान भी सहना पड़ता है। उक्त विचार कथा व्यास सुशील कुमार पाठक ने नेहरू कॉलोनी सिडकुल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताहिक ज्ञान गंगा के पंचम दिवस कथा व्यास सुशील कुमार शास्त्री ने कहा  की  देवराज इंद्र का घमंड चूर करने के लिए ही भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पूजा की शुरुआत कराई थी। इंद्र के प्रकोप से मूसलाधार बारिश से बचने के लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठा कर समस्त गोगोल वासियों की रक्षा की थी। घमंड टूटने पर इंद्र ने भी भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना की। उन्होंने कहा शक्ति के मद में चूर होकर व्यक्ति अंधा हो जाता है उसे सही गलत का ज्ञान नहीं रहता है। जो उसके पतन का कारण भी बनता है। उन्होंने कहा ईश्वर की सत्ता सबसे बड़ी है और ईश्वर की शरण में जाने पर ही व्यक्ति को सच्चा सुख प्राप्त होता है लेकिन अज्ञानता और महुआ व्यक्ति सदैव ईश्वर से दूर होता जा रहा है इसका परिणाम उसे अनेक प्रकार के संसार के दुखों को भोगना पड़ रहा है।कथा में  मूल पाठक आचार्य अनिरुद्ध तिवारी और मुख्य अजमान पवन सिंह , सुमित  अनुराग पाठक, अनुज बाजपेई, अमन सिंह, नीरा सिंह, अनिरुद्ध तिवारी, वरुण शुक्ला, रेनू शुक्ला, अश्वनी शुक्ला, शिवम शुक्ला, जुगल किशोर मिश्रा, मनीष मिश्रा सहित अन्य कॉलोनी के लोग मौजूद रहे।