प्रकृति से छेड़छाड बनती है प्राकृतिक आपदा का कारण-श्रीमहंत रामरतन गिरी

 हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने कहा है कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन एक सीमा तक ही होना चाहिए। हमें अपनी जीवनशैली को प्रकृति के अनुसार ही जीना चाहिए। प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण ही प्राकृतिक आपदाएं अपना कहर बरसाती हैं। प्रैस को जारी बयान में श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने कहा कि उत्तराखंड के चमोली जिले में आई प्राकृतिक आपदा प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ का कारण है। देवभूमि उत्तराखंड का प्राकृतिक स्वरूप पूरे विश्व में एक अलग रूप में जाना जाता है। गंगा की पवित्रता व निर्मलता सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। गंगा के वेग को रोक कर उस पर बांध बनाना अथवा अधिक मात्रा में पावर प्लांट लगाना उचित नहीं है। पूर्व में भी प्रकृति से छेड़छाड़ करने पर उत्तराखंड में एक बड़ी आपदा आई थी। जिसमें भारी जानमाल का नुकसान हुआ था वर्तमान में आई आपदा में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए उन्होंने सरकार से मांग की है कि मृतक परिवारों को अधिक से अधिक मुआवजा एवं सहायता प्रदान की जाए। सरकार को प्रकृति का संरक्षण भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए जंगलों की अंधाधुंध कटाई को रोका जाए। प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणाम ही ग्लोबल वार्मिंग है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्राकृतिक स्रोतों से छेड़छाड़ बंद कर सभी को पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रदान करना चाहिए।