कुंभ मेला कार्यों के नाम पर संतो को बरगलाया जा रहा है-सतपाल ब्रहमचारी

 हरिद्वार। भूपतवाला स्थित नरसिंह धाम यज्ञशाला में संतो ने बैठक कर कुंभ मेला कार्यों में हरिपुर कला क्षेत्र की उपेक्षा पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि कुंभ मेला प्रशासन कुंभ कार्यों को लेकर लगातार भूपतवाला, सप्तसरोवर व हरिपुरकलां क्षेत्र की उपेक्षा कर रहा है। पिछले कुंभ में मेला प्रशासन ने मुनी की रेती तक मेला कार्यों को उत्तम रूप से पूर्ण किया था। इस बार मेला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा कुंभ मेले से संबंधित कोई भी कार्य क्षेत्र में शुरू नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद मेला प्रशासन कुंभ मेले के कार्यों में रुचि नहीं दिखा रहा है। जिसे संत समाज अब बर्दाश्त नहीं करेगा। पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि कुंभ मेला प्रशासन मात्र पैसों की बंदरबांट में लगा हुआ है। कुंभ मेला कार्यों के नाम पर संतो को बरगलाया जा रहा है। कुंभ मेला शुरू होने में बहुत कम समय शेष रह गया है। मेला प्रशासन के अधिकारियों पर संतों की मांग का कोई असर नहीं पड़ रहा है। कुंभ मेले के दौरान हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु भक्तों के लिए शौचालय व पानी की व्यवस्था तक नहीं की गई है। संपूर्ण कुंभ मेला क्षेत्र को मेला प्रशासन द्वारा उपेक्षित किया जा रहा है। ऐसा लगता है कि मेला प्रशासन कुंभ मेला सम्पन्न कराना ही नहीं चाहता है। बाबा हठयोगी महाराज ने कहा है कि कुंभ मेला अधिकारियों की लचर कार्यशैली कुंभ मेला के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है। व्यवस्थाएं समय से पूर्ण न होने पर संतो व श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। कुंम मेला प्रशासन की तैयारी पूर्ण ना होने पर कुंभ के दौरान कोई भी अप्रिय घटना घटित हो सकती है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस और सख्ती से ध्यान देना चाहिए और समय रहते कुंभ के कार्य पूरे कराने चाहिए। जिससे किसी भी श्रद्धालु भक्त व संत महापुरूष को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना ना करना पड़े। युवा साधु समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंहत शिवानन्द, महामंत्री स्वामी रविदेव शास्त्री, उपाध्यक्ष संत जगदीश सिंह, कोषाध्यक्ष मंहत सुतीक्षणमुनी, स्वामी हरिहरानन्द, स्वामी दिनेशदास महाराज ने कुंम मेले के कार्य प्रारम्भ न होनेपर नारजगी व्यक्त की। स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत विष्णुदास, महंत प्रेमदास, स्वामी जगदीशानंद गिरी, महंत डोंगर गिरी, स्वामी रघुवन, सतपाल ब्रह्मचारी, महंत सूरजदास, महंत प्रेमदास, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी शिवानंद, मंहत श्रवण मुनी, मंहत सुतीक्षण मुनी, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेशदास, महंत रामकृष्णदास, महंत श्याम प्रकाश, महंत अरुणदास, स्वामी नित्यानंद आदि संत महापुरुष उपस्थित रहे।